सुधारने का वक्त

हर चीज का होता वक्त
खेलकूद -पढ़ाई -लिखाई
निकृष्ट होने का होता वक्त
जब हम बन जाते हैं निकृष्ट
कोई भी ना चाहता बुरा बने
उत्तम-अधम माहौल ही हमें
बनाता जग में उत्तम-अधम
सुधारने का भी होता ‘वक्त’ ।

बुरा बनने का शौक नहीं !
कभी-कभी बनना पड़ जाता
अच्छा से कभी – कभी हमें
हेय बनना पड़ जाता जग‌ में
परिप्रेक्ष्य के अनुसार बनो
इतना भी न बनो हृदयहीन
कि संशोधन की पड़े गरज
सुधारने का भी होता ‘वक्त’ ।


✍️✍️✍️ अमरेश कुमार वर्मा

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