सुधांशु सिंह राजपूत की रचना

मैं कतरा होकर भी तूफ़ान से जंग लेता हूँ,
मेरा बचना समन्दर की जिम्मेदारी है,
दुआ करो कि सलामत रहे मेरी हिम्मत
यह एक उनकी कई आँधियों पर भारी है!


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