घड़ी


घड़ी ही एकल जगत में ,
सबसे पृथक दिखता है ,
इसके मनोवृत्ति में नहीं ,
पीछे मुड़कर निहारना है।

राजा रंक हो या फकीर ,
उद्विग्नता नहीं करता ये ,
अपनी स्वतंत्र दुनिया में ,
हमेशा चलता रहता ये।

जो चला इसके साथ ,
वह स्वर्ग तक जाता है ,
जो ना चला इसके साथ ,
वह नरक में ही सहमता है।

न किसी का लिप्सा इसे ,
न किसी का दहशत  इसे ,
न किसी से शिकायत इसे ,
न किसी से हमदर्दी इसे ,
इसे ही कहते हैं घड़ी।

गरीब - अमीर , छोटा - बड़ा ,
कभी भेदभाव ना करता जो , 
हिंदू, मुस्लिम, सिख,  ईसाई को ,
एक तराजू में समान तौलता जो ,
उसी को कहते हैं घड़ी।

सच्चाई को अपनाकर जो ,
घड़ी के पद चिह्नों पर चलता ,
वही जगत के भविष्य में ,
ऊँंचा नाम कमाता है।

✍️✍️✍️ उत्सव कुमार वत्स
जवाहर नवोदय विद्यालय बेगूसराय, बिहार

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