धरती मां कविता



इस धरा की अद्वितीय दाता,
वो है हमारी धरती माता।
तू सृष्टि की जननी है,
तेरे नाम अनेक तू एक ही है।
धरती माता तुझे मेरा नमन है,
तेरे बिना सृष्टि सूना लगता है।
इस धरती पर जन्म लिए,
इस धरती पर ही मर जाना है।
हम धरती मां के संतान हैं,
धरती मां हमारी शान है।
इनकी मिट्टी की खुशबू में,
एक अनमोल सुगंध मिलती है।
पेड़ लगाओ हरियाली लाओ,
धरती मां को स्वर्ग बनाओ।
प्रदूषण से हो रहा धरती का ह्रास,
हम मानव ले रहे चैन की सांस।
 एक दिन ऐसा आएगा,
धरती का अस्तित्व खत्म हो जाएगा।
हमारा कर्जा धरती मां के ऊपर,
इसका कर्ज न कभी चुका पाएंगे।
हम इंसान स्वार्थ में अंधे हैं,
वह हमारी धरती माता,
निस्वार्थ की जननी है।

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